पंचायतों में भी लागू होगा नगरीय विकास का कालोनाइजर एक्ट
मध्य प्रदेश में शहरों से लगे ग्रामीण इलाकों में तेजी से विकास हो रहा है। इस विकास के मद्देनजर, अब पंचायत क्षेत्रों में भी नगरीय विकास का कालोनाइजर एक्ट लागू होगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस संबंध में निर्देश दिए हैं, जिसके बाद नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है।
प्रदेश में शहरीकरण तेजी से बढ़ रहा है। शहरों में भूखंडों का मूल्य अधिक होने के कारण पास की पंचायतों में तेजी से नई कॉलोनियां विकसित हो रही हैं। वर्तमान में पंचायत क्षेत्रों में कॉलोनाइजर को अनुमतियां अधिक आसानी से मिल जाती हैं।
कॉलोनाइज़र कॉलोनियां तो बना देते हैं, लेकिन आवश्यक सुविधाओं का विकास नहीं करते। पंचायतें इस पर ध्यान नहीं देतीं, और जब ये कॉलोनियां नगरीय निकायों में शामिल होती हैं, तो विकास से जुड़े मुद्दे सामने आते हैं।
इसी समस्या को देखते हुए राज्य सरकार ने यह निर्णय लिया है कि नगरीय क्षेत्र से लगी पंचायतों में भी नगरीय विकास एवं आवास विभाग के कालोनाइजर एक्ट के प्रविधान लागू किए जाएंगे। इसके लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर नियमों में संशोधन किया जाएगा।
बड़े शहरों के आस-पास गांवों में बन रही कॉलोनियां
प्रदेश के भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन सहित अन्य शहरी क्षेत्रों के आस-पास कॉलोनियां तेजी से विकसित हो रही हैं। क्योंकि यह क्षेत्र ग्रामीण हैं, यहां अनुमतियां आसानी से मिल जाती हैं और निगरानी भी कम होती है।
कॉलोनाइजर कॉलोनियां तो बना देते हैं, लेकिन आवश्यक अधोसंरचना जैसे सड़कें, नालियां, जल आपूर्ति और खुले स्थानों का विकास नहीं करते। नियमानुसार, खाली भूमि भी नहीं छोड़ी जाती।
नगरीय निकायों पर बढ़ता दबाव
आश्रय शुल्क जिला पंचायत में जमा कर दिया जाता है, लेकिन इसे संबंधित क्षेत्र के विकास में उपयोग नहीं किया जाता। जब ये क्षेत्र नगरीय निकायों में शामिल होते हैं, तो अन्य क्षेत्रों के समान विकास की मांग उठती है।
इससे निकायों पर दबाव बनता है, लेकिन वित्तीय स्थिति ठीक न होने के कारण कार्यों में रुकावट आती है। इसी को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि नियम इस प्रकार बनाए जाएं ताकि अवैध कॉलोनियां बनने से रोकी जा सकें और जो कॉलोनियां पहले से बनी हैं, वहां विकास कार्यों पर ध्यान दिया जाए।



