यूजीसी के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक
सुप्रीम कोर्ट ने 29 जनवरी को यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नए नियमों पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या की बेंच ने कहा कि नियमों के प्रावधान स्पष्ट नहीं हैं और इनका गलत इस्तेमाल किया जा सकता है।
कोर्ट ने यह टिप्पणी मृत्युंजय तिवारी, एडवोकेट विनीत जिंदल और राहुल दीवान द्वारा दायर याचिकाओं पर की। याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि नए नियम जनरल कैटेगरी के छात्रों के साथ भेदभाव करते हैं।
यूजीसी ने 13 जनवरी को अपने नए नियमों को अधिसूचित किया था, जिनका देशभर में विरोध हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और यूजीसी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है और नियमों का ड्राफ्ट दोबारा तैयार करने का निर्देश दिया है।
कोर्ट ने कहा कि इस मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी। तब तक 2012 के UGC नियम पूरे देश में लागू रहेंगे।
कोर्ट ने सवाल उठाया कि जब ‘भेदभाव’ की परिभाषा पहले से ही सभी प्रकार के भेदभाव को कवर करती है, तो ‘जाति-आधारित भेदभाव’ को अलग से परिभाषित करने की आवश्यकता क्यों पड़ी।
कोर्ट ने यह भी पूछा कि रेगुलेशंस में रैगिंग को क्यों शामिल नहीं किया गया, जबकि यह शैक्षणिक परिसरों में एक गंभीर समस्या है।
CJI ने टिप्पणी की कि अनुसूचित जातियों में भी कई लोग अब आर्थिक रूप से समृद्ध हो चुके हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या जातिविहीन समाज की दिशा में हुई प्रगति के बाद हम फिर से पीछे जा रहे हैं।
CJI ने अलग-अलग जातियों के लिए अलग हॉस्टल बनाने के प्रस्ताव पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, “भगवान के लिए ऐसा मत कीजिए। हम सब साथ रहते थे, आज अंतरजातीय विवाह भी होते हैं। भारत की एकता शैक्षणिक संस्थानों में भी दिखनी चाहिए।”