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कृषि क्षेत्र में बढ़ते बहुआयामी करियर का नया दौर


यकीनन इस समय कृषि यानी एग्रीकल्चर में करियर बनाने के लिए नई पीढ़ी का रुझान तेजी से बढ़ रहा है। इस समय पूरी दुनिया में भारत को खाद्यान्न का नया वैश्विक कटोरा माना जा रहा है। भारत दुनिया का तीसरा बड़ा खाद्यान्न उत्पादक देश है। दुनिया में भारत सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश बना हुआ है। गेहूं तथा फलों के उत्पादन के मामले में भारत दुनिया में दूसरे स्थान पर तथा सब्जियों के उत्पादन में तीसरे स्थान पर है। विश्व स्तर पर, भारत केला, आम, अमरूद, पपीता, अदरक, भिंडी, चावल,  चाय, गन्ना, काजू,  नारियल, इलायची और काली मिर्च आदि के प्रमुख उत्पादक के रूप में जाना जाता है। साथ ही खाद्य प्रसंस्करण के मामले में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। इन विविध क्षेत्रों में करियर के मौके छलांगे लगाकर बढ़ रहे हैं ।

कृषि सेक्टर की बढ़ती जीडीपी और कृषि क्षेत्र में बढ़ते करियर

निश्चित रूप से देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में कृषि क्षेत्र के मजबूत योगदान के कारण इस क्षेत्र में करियर के मौके बढ़ रहे हैं। सरकार के द्वारा कृषि विकास के लिए एक के बाद एक जो रणनीतिक कदम उठाए गए उनसे जहाँ एक ओर भारत में कृषि क्षेत्र अधिक प्रतिस्पर्धी एवं लाभदायक बन रहा है, वहीं दूसरी ओर छोटे किसान अधिक लाभांवित हो रहे हैं। इससे जीडीपी में कृषि क्षेत्र की हिस्सेदारी बढ़ती जा रही है।

किसानों का बढ़ता सशक्तिकरण और कृषि में बढ़ते अवसर

जैसे-जैसे देश में किसानों का सशक्तिकरण बढ़ रहा है और कृषि एवं ग्रामीण विकास की अहमियत बढ़ती जा रही है, वैसे-वैसे कृषि में रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं। देश में फसलों के लिए किसानों को लाभप्रद न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) दिए जा रहे हैं। सरकार के द्वारा किसानों को दी गई पीएम किसान सम्मान निधि, जनधन खातों में ट्रांसफर किए जाने ग्रामीण क्षेत्रों में उर्वरक, बीज, कृषि रसायन, ट्रैक्टर एवं कृषि उपकरण, जैसी कृषि क्षेत्र से जुड़ी हुई वस्तुओं का उत्पादन बढ़ रहा है, इन सबसे किसान सशक्त होते जा रहे हैं और कृषि रोजगारों का दायरा बढ़ रहा है।

ग्रामीण विकास के बुनियादी ढाँचे में करियर के नए मौके

निसंदेह वर्ष 2020 और 2021 में देश में आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत जिस तरह कृषि एवं ग्रामीण विकास के बुनियादी ढांचे और कृषि सुधारों के जो प्रयास किए गए हैं, उनसे रोजगार के मौके बढ़े हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर फंड के लिए एक लाख करोड़ रुपये की वित्तपोषण की सुविधा तेजी से आगे बढ़ी है। कृषि ऋण समितियों, किसान समूहों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), कृषि-उद्यमियों, स्टार्टअप्स और खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े उद्योग लगाने के लिए 2 करोड़ रुपए तक की क्रेडिट गारंटी सरकार लेती है और ब्याज में 3 फीसदी सालाना की रियायत दी जाती है। इन सबसे मौके बढ़े हैं।

खाद्य सुरक्षा व खाद्यान्न भंडारण से बढ़ते अवसर

24 फरवरी 2024 को सरकार ने सहकारी क्षेत्र में दुनिया की सबसे बड़ी खाद्यान्न भंडारण योजना के लिए प्रायोगिक परियोजना लांच की है। यह प्रायोगिक परियोजना 11 राज्यों में प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) को लक्षित कर रही है, जिनके माध्यम से पैक्स की किसानों के हित में बहुआयामी भूमिका होगी। ऐसे में नई खाद्यान्न भंडार योजना के माध्यम देश में खाद्यान्न भंडारण की जो क्षमता फिलहाल 1450 लाख टन की है, उसे अगले 5 साल में सहकारी क्षेत्र में 700 लाख टन अनाज भंडारण की नई क्षमता विकसित करके कुल खाद्यान्न भंडारण क्षमता 2150 लाख टन किए जाने का लक्ष्य रखा गया है। पैक्स के स्तर पर भंडार गृह, प्रसंस्करण इकाई आदि कृषि व्यवस्थाएँ निर्मित करके पैक्स को बहुउद्देशीय बनाए जाने से खाद्यान्न भंडारण संबंधी विभिन्न कामों में भी करियर के बहुआयामी मौके बढ़ेंगे।

फरवरी 2024 में भारत के द्वारा संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के अबूधाबी में आयोजित विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के 13वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में खाद्य सुरक्षा, खाद्यान्नों के सार्वजनिक भंडारण एवं न्यूनतम समर्थन (एमएसपी) के स्थाई समाधान के लिए प्रभावी पहल की गई, जिसके कारण इस सम्मेलन में इन मुद्दों पर कई विकसित देश भारत के किसानों के हितों के प्रतिकूल कोई प्रस्ताव आगे नहीं बड़ा पाए। ऐसे में अब भी भारत अपने किसानों के उपयुक्त लाभ के लिए नीतियाँ बनाते हुए खाद्य सुरक्षा और सार्वजनिक भंडारण की सुविधा से कृषि में युवाओं के लिए अवसर बढ़ा सकेगा।

प्राकृतिक खेती और श्रीअन्न में रोजगार के नए मौके

देश में प्राकृतिक खेती को विशेष प्राथमिकता दिए जाने से प्राकृतिक खेती रोजगार का अच्छा माध्यम बनते हुए दिखाई दे रही है। प्राकृतिक खेती से सबसे अधिक फायदा देश के 80 फीसदी ऐसे छोटे किसानों को होगा, जिनके पास 2 हेक्टेयर से कम भूमि है। इनमें से अधिकांश किसानों का काफी खर्च केमिकल फर्टिलाइजर पर होता है। अगर वो प्राकृतिक खेती की तरफ मुड़ेंगे तो उनकी स्थिति और बेहतर होगी और इससे रोजगार मौके बढ़ेंगे। साथ ही वर्ष 2023 को जिस तरह भारत ने संयुक्त राष्ट्र संघ से अंतरराष्ट्रीय श्रीअन्न वर्ष घोषित कराया और श्रीअन्न को दुनियाभर में लोकप्रिय बनाया उससे भी श्री अन्न के तहत रोजगार के मौके बढ़ेंगे।

कृषि निर्यात क्षेत्र में करियर के वैश्विक मौके-

जहाँ कोविड-19 की आपदाओं के बीच जहाँ भारत ने वैश्विक स्तर पर दुनिया के जरूरतमंद देशों की खाद्य सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने में अहम भूमिका निभाई है, वहीं दुनियाभर में कृषि उत्पादों के निर्यात बढ़ाने का अवसर भी मुठ्ठियों में लिया है। उससे भी कृषि निर्यात के विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार के मौके बढ़े हैं। अब दुनिया में कृषि उत्पादों की कमी के बीच भारत के कृषि निर्यात बढ़ते जा रहे हैं। भारत से अनाज, गैर-बासमती चावल, बाजरा, मक्का और अन्य मोटे अनाज के अलावा फलों एवं सब्जियों के निर्यात में भारी वृद्धि देखी गई है। भारत के कृषि उत्पादों के बड़े बाजारों में अमेरिका, चीन, बांग्लादेश, वियतनाम, इंडोनेशिया, नेपाल, ईरान और मलेशिया शामिल हैं। कई छोटे देशों के बाजार भी मुठ्ठियों में आए है। उल्लेखनीय है कि विश्व बाजार में भारत के मसालों की खुशबू की धमक बहुत अधिक बढ़ी है। चूँकि देश में मसाले की खेती में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा गया, अतएव इसका असर वैश्विक बाजार में मसालों की निर्यात मांग बढ़ने के रूप में दिखा है। इन सबसे करियर मौके बढ़ रहे हैं।

कृषि निर्यात में भारत का स्थान सातवां है। भारत से 50 हजार अमेरिकी डॉलर से अधिक मूल्य का कृषि निर्यात होता है। खासतौर से खाद्य प्रसंस्करण में ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है जहां निर्यात में वृद्धि नहीं हुई है। भारत की खाद्य प्रसंस्करण क्षमता 12 लाख टन से बढ़कर दो सौ लाख टन हो गई है। नौ वर्षों में 15 गुना वृद्धि है। इस उद्योग से जुड़ी हर कंपनी और स्टार्ट-अप के लिए स्वर्णिम दौर है। निर्यात में प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों की हिस्सेदारी 13 से बढ़कर 23 प्रतिशत हो गई है। भारत में खाद्य प्रसंस्करण के तहत पांच क्षेत्र हैं। एक डेयरी क्षेत्र, दो फल एवं सब्जी प्रसंस्करण, तीन, अनाज का प्रसंस्करण, चार, मांस मछली एवं पोल्ट्री प्रसंस्करण तथा पाँच, उपभोक्ता वस्तुएं पैकेट बंद खाद्य और पेय पदार्थ। इसमें कोई दो मत नहीं है कि सरकार के द्वारा देश में खाद्य प्रसंस्करण सेक्टर के तहत इन पांचों क्षेत्रों की व्यापक संभावनाओं को मुठ्ठियों में करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। इन सब क्षेत्रों में रोजगार बढ़ रहे हैं।

कृषि सेक्टर में करियर के लिए शैक्षणिक जरूरतें और जरूरी स्किल्स

कृषि के क्षेत्र में करियर के लिए 10वीं के बाद एग्रीकल्चर, फिजिक्स, केमेस्ट्री के अलावा फिजिक्स केमेस्ट्री और मेथ्स या फिजिक्स केमेस्ट्री और बायोलॉजी विषय समूह चुने जाने पर ध्यान दिया जाना जरूरी है। कृषि के विभिन्न पाठ्यक्रमों के लिए 12वीं के बाद राज्य स्तर प्रवेश परीक्षाओं के अलावा केंद्रीय स्तर पर अखिल भारतीय कृषि प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाती है। कृषि के स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के माध्यम से बहुत अच्छे करियर की ओर आगे बढ़ा जा सकता है। 12 वीं के बाद कृषि में स्नातक 4 साल का कोर्स है, जिसको बीएससी-एग्रीकल्चर/ बीएससी–एग्रीकल्चर (ऑनर्स) कोर्स कहते हैं। प्रमुख पाठ्यक्रम में बीएससी इन एग्रोनॉमी, बीएससी इन एग्रीकल्चरल ईको एंड फार्म मैनेजमेंट, बीएससी इन एग्रीकल्चरल मीटिओरोलॉजी, बीएससी इन एग्रीकल्चरल बायो टेक्नोलॉजी, बीएससी इन एग्रीकल्चरल स्टेटिस्टिक्स, बीएससी इन एग्रोनॉमी, बीएससी इन एग्रीकल्चरल मार्केटिंग एंड बिजनेस मैनेजमेंट, बीएससी इन बायो केमेस्ट्री एंड एग्रीकल्चरल केमेस्ट्री, बीएससी इन क्रॉप फिजियोलॉजी, बीएससी इन एनटोमोलॉजी, बीएससी ऑनर्स इन एग्रीकल्चर आदि शामिल है।  

कृषि क्षेत्र में करियर के बहुआयामी अवसर

कृषि क्षेत्र में जाने का अर्थ सिर्फ किसान बनना ही नहीं है। अब इसका बहुआयामी क्षेत्र हैं। जैसे-जैसे खेतों और किसानों तक नई टेक्नोलॉजी पहुँच रही है तथा कृषि के लिए ड्रोन टेक्नोलॉजी का उपयोग भी हो रहा है, वैसे-वैसे एग्रीकल्चर सब्जेक्ट अच्छे करियर का विकल्प बनता जा रहा है। कृषि क्षेत्र के विभिन्न कोर्स के बाद देश ही नहीं दुनिया में करियर बनाया जा सकता है। इनमें फुड टेक्नोलॉजी, डेरी टेक्नोलॉजी, फूड इंजीनियरिंग, फिशरीज साइंस, फ्लोरीकल्चर, हार्टिकल्चर, वेटरनरी साइंस, एग्रीकल्चर रिसर्च जैसे प्रमुख है। कृषि में रोजगार और स्वरोजगार के मौके बड़ी संख्या में है। एग्रीकल्चर इंजीनियर के लिए मैन्यूफैक्चरिंग कंपनी, वाटर रिसोर्स मैनेजमेंट, फॉरेस्ट्री, रूरल डेवलपमेंट, फूड प्रोसेसिंग, मशीन डेवलपमेंट आदि क्षेत्रों में करियर के प्रचुर हैं। बैंकों में एग्रीकल्चर साइंस से जुड़े पेशेवरों की आवश्यकता होती है, जो एडवांस क्रेडिट, लोन और कृषि पर आधारित प्रोजेक्ट डील करते हैं। इतना ही नहीं संघ लोक सेवा आयोग भी हर साल एग्रीकल्चरल स्पेशलिस्ट पद पर नियुक्ति के लिए इंडियन फॉरेस्ट सर्विस परीक्षा का आयोजन करती है। भारत सरकार व राज्य सरकारों के कृषि से संबद्ध सभी विभाग, आईसीएआर के सभी अनुसंधान केंद्र व स्टेट एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी, कृषि अधिकारी, कृषि विज्ञान केंद्र, स्टेट एग्रीकल्चर रिसर्च स्टेशन, मृदा जाँच केंद्र, राष्ट्रीय बीज निगम, केंद्रीय कृषि पशुपालन मंत्रालय व कृषि विभाग, राज्य कृषि व पशुपालन मंत्रालय व विभाग, जल एवं पर्यावरण मंत्रालय, मौसम विभाग आदि प्रमुख हैं।

निश्चित रूप से कृषि का करियर नए वैश्विक दौर का ऐसा करियर है, जिसके लिए कुछ स्किल्स के साथ प्रवेश करने से करियर की ऊँचाइयाँ मिल सकती हैं। इनमें परिश्रम, कृषि के प्रति रुझान, शोध एवं नवाचार की पहल आदि प्रमुख हैं। जो भी कृषि के क्षेत्र में जाने का मन रखते हैं उनके लिए इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च में अपना हुनर दिखाना अच्छा मौका है। देश में एग्रीकल्चरल फील्ड में समुचित ट्रेनिंग लेने के बाद बतौर सरकारी और निजी कृषि कर्मचारी जैसे फार्म मैनेजर, सुपरवाइजर, सॉइल साइंटिस्ट, एंटोमोलॉजिस्ट, पैथोलोजिस्ट, हॉर्टिकल्चरिस्ट, एग्रोनोमिस्ट, मौसम वैज्ञानिक, पशुपालन विशेषज्ञ, एग्रीकल्चरल इंजीनियर, एग्रीकल्चरल कम्प्यूटर इंजीनियर, एग्रीकल्चर फ़ूड साइंटिस्ट, एग्रीकल्चर रिसर्च ऑफिसर, एग्रीकल्चर ऑफिसर, प्लांट फिजियोलॉजिस्ट, सर्वे रिसर्च एग्रीकल्चर इंजीनियर, एनवायर्नमेंटल कंट्रोल्स इंजीनियर, माइक्रोबायोलॉजिस्ट, फ़ूड सुपरवाइजर, रिसर्चर, एग्रीकल्चर क्रॉप इंजीनियर, बी कीपर, फिशरी मैनेजर, बोटेनिस्ट, सॉयल इंजीनियर, सॉयल एंड प्लांट साइंटिस्ट, लेब टेक्नीशियन और मीडिया मैनेजर आदि के रूप में रोजगार की प्राप्ति कर सकते हैं।

ऐसे बढ़े कृषि में करियर के लिए

यह बात महत्वपूर्ण है कि मध्यप्रदेश एवं देश के विभिन्न कृषि से सम्बद्ध विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में कृषि के डिप्लोमा, डिग्री, पोस्ट ग्रेजुएशन और कृषि से संबंधित विभिन्न विशेषज्ञताओं के कोर्स उपलब्ध हैं। आप उपयुक्तता के अनुरूप अच्छे शैक्षणिक संस्थान का चयन करें और कृषि क्षेत्र के विभिन्न करियर में से अपनी रुचि, योग्यता और क्षमता के अनुरूप सबसे उपयुक्त करियर की सफल मंजिल की ओर तेजी से आगे बढ़िए ।

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म.प्र. कर्मचारी चयन मंडल समूह-1, उप समूह-3 के अन्तर्गत खंड विस्तार अधिकारी, सांख्यिकी अधिकारी, प्रबंधक (सामान्य), सामाजिक कार्यकर्ता व अन्य समकक्ष रिक्त पदों की पूर्ति हेतु संयुक्त भर्ती परीक्षा - मूल्य मात्र -350 रु