ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में SIR मतदाता सूची मामले में दलीलें दीं


ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में SIR मतदाता सूची मामले में दलीलें दीं

4 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) मामले पर सुनवाई की। इस दौरान राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी वकीलों के साथ व्यक्तिगत रूप से पेश हुईं। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल चुनाव आयोग राज्य को निशाने पर ले रहा है और जो काम 2 साल में होना था, उसे 3 महीने में पूरा किया जा रहा है।

सुनवाई के बाद CJI सूर्यकांत की बेंच ने कहा कि असली मतदाता चुनावी सूची में बने रहना चाहिए। ममता की याचिका पर बेंच ने चुनाव आयोग और पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से 9 फरवरी तक जवाब मांगा।

सुप्रीम कोर्ट में पहली बार मुख्यमंत्री द्वारा दलील

सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में यह पहला मौका था जब किसी राज्य की मौजूदा मुख्यमंत्री ने व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होकर दलीलें दीं। आम तौर पर मुख्यमंत्री के वकील या सलाहकार ही मुकदमों में पेश होते हैं।

ममता बनर्जी के आरोप और चिंताएं

  • उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले SIR प्रक्रिया को दो साल के बजाय दो महीने में पूरा करने की कोशिश की जा रही है।
  • कृषि और फसल मौसम के दौरान लोगों को परेशान किया जा रहा है।
  • अब तक 58 लाख लोगों के नाम हटा दिए गए हैं, जिन्हें वे SIR प्रक्रिया के पीड़ित मानती हैं।
  • भाजपा द्वारा नियुक्त माइक्रो ऑब्जर्वर BLO अधिकारों को दरकिनार कर नाम हटा रहे हैं।
  • शादियों के बाद बेटियों के नाम हटाए गए, और असली मतदाता बाहर किए जा रहे हैं।

चुनाव आयोग का जवाब

चुनाव आयोग ने कहा कि राज्य सरकार ने पर्याप्त ग्रुप बी अधिकारी नहीं दिए, इसलिए माइक्रो ऑब्जर्वर नियुक्त करने पड़े। सभी नोटिसों में कारण दिए गए। नाम हटाए गए मतदाता अधिकृत एजेंटों को भी दिखाए गए। आयोग ने कहा कि समय की कोई समस्या नहीं है, लेकिन राज्य सहयोग नहीं कर रहा है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश

CJI सूर्यकांत ने कहा कि सभी नोटिस वापस लेना अव्यवहारिक है। चुनाव आयोग को नाम की स्पेलिंग में गड़बड़ी होने पर नोटिस नहीं जारी करना चाहिए। यदि राज्य सरकार स्थानीय भाषा जानने वाले अधिकारियों की टीम देती है, तो जांच करके सही जानकारी दी जा सकती है। असली मतदाता को बाहर नहीं किया जाना चाहिए।

ममता बनर्जी का कानूनी और राजनीतिक अनुभव

ममता बनर्जी ने 1982 में LLB पूरा किया और 1980 के दशक में कलकत्ता हाई कोर्ट में वकील के रूप में प्रैक्टिस की। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होने की अनुमति मांगी और दावा किया कि वे कोर्ट के नियमों और प्रक्रियाओं को समझती हैं।

महाभियोग की मांग

3 फरवरी को दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस में ममता ने CEC के खिलाफ महाभियोग की मांग की और विपक्षी दलों का समर्थन जुटाने की कोशिश की। उन्होंने SIR प्रक्रिया और भाजपा की selective implementation को लेकर गंभीर आरोप लगाए।




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