भारतीय मूर्तिकार राम वनजी सुतार का 100 वर्ष की आयु में निधन
प्रसिद्ध भारतीय मूर्तिकार राम वनजी सुतार के निधन से कला जगत में एक युग का अंत हो गया है। 17 दिसंबर, 2025 की मध्यरात्रि को 100 वर्ष की आयु में उनका निधन हुआ। राम सुतार पिछले कुछ महीनों से बीमार चल रहे थे। 100 साल 10 महीने की उम्र पूरी करके उन्होंने अपनी अंतिम साँस ली। उनका अंतिम संस्कार नोएडा के सेक्टर 94 में किया गया, जहाँ केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले और महाराष्ट्र सरकार के मंत्री जय कुमार जितेंद्र सिंह रावल ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। राम वनजी सुतार के अंतिम संस्कार में कई बड़े नेता शामिल हुए और सभी ने नम आँखों से उन्हें विदाई दी।
राम सुतार का जन्म 19 फरवरी, 1925 को महाराष्ट्र के धुले जिले के गोंडूर गाँव में हुआ था। उन्होंने मुंबई के प्रसिद्ध जे जे स्कूल ऑफ आर्ट्स से शिक्षा प्राप्त की और अपने सात दशकों के लंबे करियर में भारतीय मूर्तिकला को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया। राम सुतार की कला की विशेषता उनकी शिल्पकला में थी, जहाँ उन्होंने शारीरिक संरचना की नसों तक को जीवंत बना दिया। उनकी मूर्तियाँ न केवल सुंदर होती थीं, बल्कि उनमें जीवन का अहसास भी होता था।
राम सुतार की कला का योगदान
राम सुतार की अंगुलियाँ बात करते हुए भी ऐसे चलती थीं मानो वह शिल्प गढ़ रहे हों। उनकी कला में जीवंतता थी, जो हर मूर्ति में बेजोड़ तरीके से उभरती थी। शारीरिक संरचना के छोटे से छोटे हिस्से को भी उन्होंने बहुत खूबसूरती से पेश किया, जिससे उनकी मूर्तियाँ सजीव प्रतीत होती थीं। उनका योगदान भारतीय मूर्तिकला में अनमोल रहेगा और आने वाली पीढ़ियाँ उनसे प्रेरित होती रहेंगी।