देश में पहली बार कबूतरों को सार्वजनिक स्थान पर दाना चुगाने पर सजा
भारत में पहली बार किसी व्यक्ति को सार्वजनिक स्थान पर कबूतरों को दाना डालने के लिए सजा दी गई है। यह मामला अपने आप में अनोखा है, जहां बांद्रा की एक मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट अदालत ने दादर के एक 52 वर्षीय व्यवसायी पर जुर्माना लगाया। जुलाई में बॉम्बे हाईकोर्ट ने खुले में कबूतरों को दाना डालने पर प्रतिबंध लगाया था, और इसके बावजूद व्यवसायी ने दाना डालने की गलती की।
कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक स्थान पर कबूतरों को दाना डालना न केवल सरकारी आदेशों का उल्लंघन है, बल्कि यह कृत्य सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा था। 22 दिसंबर को बांद्रा के 9वें कोर्ट के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट वीयू मिसाल ने दादर निवासी नितिन शेट को भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 223(ख) और 271 के तहत दोषी ठहराया। ये धाराएं लोक सेवक के वैध आदेश की अवहेलना करने और जीवन के लिए खतरनाक रोगों के संक्रमण फैलाने से संबंधित हैं।
कोर्ट द्वारा जुर्माना और सजा
कोर्ट ने इन दोनों आरोपों में नितिन शेट पर 3,000 रुपये और 2,000 रुपये का जुर्माना लगाया। 1 अगस्त 2025 को बॉम्बे पुलिस ने जेएलजे रोड पर हिंदुजा अस्पताल के पास कबूतरों के लिए बने कबूतरखाने के पास शेट को दाना डालते हुए पकड़ा था और उनके खिलाफ मामला दर्ज किया था। पुलिस ने कहा कि यह कृत्य मानव जीवन, स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए खतरा था और बीमारियों के फैलाव में योगदान कर सकता था।
एक महीने बाद पुलिस की चार्जशीट के बाद शेट ने कोर्ट में अपना अपराध स्वीकार कर लिया। मामले की सुनवाई करते हुए मजिस्ट्रेट ने कहा कि इस कृत्य से मानव जीवन, स्वास्थ्य या सुरक्षा को खतरा उत्पन्न हुआ है और सरकारी आदेशों का उल्लंघन किया गया है, जिससे यह दंडनीय अपराध बनता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि शेट ने यह कृत्य जानबूझकर या लापरवाही से किया, जिसके बारे में उसे पहले से जानकारी थी।
कबूतरों से स्वास्थ्य जोखिम
यह सजा देने के बाद सार्वजनिक स्वास्थ्य समर्थकों और पक्षी प्रेमियों के बीच मतभेद सामने आए हैं। कबूतरों को दाना डालने से कई स्वास्थ्य संबंधी खतरों का सामना करना पड़ सकता है। कबूतरों की बीट और उनके पंखों में बैक्टीरिया होते हैं, जो विभिन्न बीमारियों का कारण बन सकते हैं।
एक अध्ययन में यह पाया गया है कि कबूतरों की बीट में मौजूद बैक्टीरिया फेफड़ों और सांस संबंधी बीमारियों को फैला सकते हैं। इसके अलावा, कबूतरों के मल और पंखों से निकलने वाले बैक्टीरिया और फंगस से गंभीर बीमारियों जैसे क्रिप्टोकोकस, हिस्टोप्लास्मोसिस, साल्मोनेला और ई-कोलाई हो सकती हैं। ये बीमारियाँ पंखों की सूजन, निमोनिया और पेट संबंधी रोग उत्पन्न कर सकती हैं। यही कारण है कि कई शहरों में कबूतरों को दाना डालने पर प्रतिबंध लगाया गया है।