जोड़ प्रत्यारोपण के जनक डॉ. चितरंजन राणावत नहीं रहे


जोड़ों के जादूगर नहीं रहे: डॉ. चितरंजन सिंह राणावत का निधन

जोड़ प्रत्यारोपण सर्जरी को आधुनिक रूप देने वाले विश्व प्रसिद्ध अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. चितरंजन सिंह राणावत का 26 नवंबर को न्यूयॉर्क में निधन हो गया। वे 1 अप्रैल 1934 को मध्यप्रदेश के नीमच जिले के सरवनिया गांव में जन्मे थे। उन्होंने अपनी प्रारंभिक चिकित्सा शिक्षा इंदौर से प्राप्त की और आगे का कार्यक्षेत्र न्यूयॉर्क को बनाया।

डॉ. राणावत ने घुटना और कूल्हा प्रत्यारोपण तकनीक को नया आयाम दिया और वैश्विक पहचान बनाई। भारत सरकार ने उन्हें 2001 में पद्म भूषण से सम्मानित किया। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के घुटनों की सफल सर्जरी की थी।

उन्होंने डेली कॉलेज, होलकर साइंस कॉलेज और एमजीएम मेडिकल कॉलेज से पढ़ाई की। एमवायएच में इंटर्नशिप करने के बाद विक्रम विश्वविद्यालय से एमएस किया और फिर अमेरिका में शोध कार्य आरंभ किया।

डॉ. राणावत ने राणावत ऑर्थोपेडिक फाउंडेशन की स्थापना की, इंदौर में सर्जनों को प्रशिक्षित किया और कॉर्नेल यूनिवर्सिटी में चिकित्सा शिक्षा को एक नया दृष्टिकोण दिया। उनके द्वारा विकसित की गई तकनीकों और इम्प्लांट्स ने लाखों मरीजों को फिर से चलने की उम्मीद दी।

वे सिर्फ एक महान सर्जन ही नहीं, बल्कि एक प्रेरणादायक शिक्षक और मार्गदर्शक भी थे। जैसे संगीत में लता मंगेशकर और क्रिकेट में सचिन तेंदुलकर का नाम अमर है, वैसे ही जोड़ प्रत्यारोपण सर्जरी में डॉ. राणावत का नाम सदा के लिए अमर रहेगा।




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