भारत में एआई निवेश की होड़, 6 लाख करोड़ रु. लगाएंगी 4 कंपनियाँ
भारत तेजी से एआई और क्लाउड तकनीक के क्षेत्र में वैश्विक हब बनता जा रहा है। बुधवार को अमेजन ने घोषणा की कि वह 2030 तक भारत में कुल निवेश बढ़ाकर 3.6 लाख करोड़ रुपये करेगी। यह कदम उस समय आया है जब देश में टेक्नोलॉजी कंपनियों का ध्यान बढ़ती प्रतिभा और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की ओर केंद्रित हो रहा है।
कंपनियों का निवेश विवरण
अमेजन: तेलंगाना और महाराष्ट्र में पहले ही 1.14 लाख करोड़ रुपये निवेश की घोषणा कर चुकी अमेजन अब कुल 3.6 लाख करोड़ रुपये खर्च करेगी। इससे देश में 1.2 लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा।
मेटा: अगस्त में रिलायंस इंडस्ट्रीज के साथ साझेदारी में मेटा ने भारत और अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों में एआई समाधान विकसित करने के लिए 900 करोड़ रुपये का प्रारंभिक निवेश किया।
माइक्रोसॉफ्ट: माइक्रोसॉफ्ट अगले चार वर्षों में 1.57 लाख करोड़ रुपये निवेश करेगी। यह निवेश एआई, क्लाउड और डेटा सेंटर इन्फ्रास्ट्रक्चर के विस्तार पर केंद्रित होगा। कंपनी के भारत में 22,000 से अधिक कर्मचारी हैं।
गूगल: गूगल आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में एआई हब और डेटा सेंटर के निर्माण के लिए पांच वर्षों में 1.35 लाख करोड़ रुपये निवेश करेगी। यह गूगल का अमेरिका के बाहर सबसे बड़ा एआई/डेटा सेंटर प्रोजेक्ट होगा।
अडाणी ग्रुप की योजना
गौतम अडाणी ने IIT धनबाद में बताया कि समूह अगले छह साल में 10 से 12 लाख करोड़ रुपये निवेश करेगा। यह राशि इन्फ्रास्ट्रक्चर, खनन, नवीकरणीय ऊर्जा और बंदरगाह परियोजनाओं में खर्च होगी। गुजरात में दुनिया का सबसे बड़ा 30 गीगावाट वाला ग्रीन एनर्जी पार्क भी निर्माणाधीन है।
भारत में एआई निवेश का महत्व
थिंक टैंक ITIF की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हर साल लगभग 8 लाख इंजीनियरिंग स्नातक निकलते हैं, जो अमेरिका की तुलना में छह गुना अधिक हैं। इसके अलावा, वैश्विक सेमीकंडक्टर डिजाइन वर्कफोर्स का 20% से अधिक हिस्सा भारत में मौजूद है। यह कंपनियों के लिए उच्च गुणवत्ता वाला टेक टैलेंट उपलब्ध कराता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन निवेशों से भारत में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और देश वैश्विक एआई इकोसिस्टम में प्रमुख खिलाड़ी बन जाएगा। डेटा सेंटर और एआई हब के निर्माण से डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगा और टेक्नोलॉजी आधारित स्टार्टअप्स को भी अवसर मिलेंगे।