बीमा क्षेत्र में 100% एफडीआई: भारत के विकास को एक नया मार्ग


बीमा क्षेत्र में 100% एफडीआई: भारत के विकास को एक नया मार्ग

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 16 दिसंबर को लोकसभा में बहुप्रतीक्षित 'सबका बीमा सबकी रक्षा विधेयक 2025' पेश किया। इस विधेयक का उद्देश्य भारत के बीमा क्षेत्र में विदेशी निवेश (एफडीआई) को 100% तक बढ़ाना है। इससे न केवल बीमा कंपनियों की कार्यक्षमता बढ़ेगी, बल्कि आम जनता को बीमा तक बेहतर पहुंच भी प्राप्त होगी।

विधेयक पेश करते हुए वित्त मंत्री ने बताया कि इस विधेयक के माध्यम से बीमा क्षेत्र में पारदर्शिता लाई जाएगी, अनुपालन की प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाएगा और एफडीआई को बढ़ावा मिलेगा। इस विधेयक के तहत बीमा क्षेत्र के तीन प्रमुख कानूनों - बीमा अधिनियम 1938, जीवन बीमा निगम अधिनियम 1956 और बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण अधिनियम 1999 में संशोधन प्रस्तावित है।

वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि 2015 में 26% से एफडीआई की सीमा बढ़ाकर 74% की गई थी और अब इसे 100% तक बढ़ाने का प्रस्ताव है। इस कदम से बीमा कंपनियों की संख्या बढ़ी है और बीमा प्रीमियम में भी इजाफा हुआ है।

विधेयक की पांच प्रमुख बातें

  • बीमा क्षेत्र में 100% एफडीआई: अब तक भारतीय बीमा कंपनियों में विदेशी निवेश की सीमा 74% थी। इस विधेयक के पारित होने के बाद विदेशी कंपनियां 100% स्वामित्व के साथ भारत में काम कर सकेंगी। इससे विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ेगा और ग्लोबल बीमा कंपनियां अपनी नई तकनीक और उत्पाद भारतीय ग्राहकों तक पहुंचा सकेंगी।
  • एलआईसी के बोर्ड को अधिक अधिकार: विधेयक के तहत, एलआईसी अधिनियम 1956 में संशोधन कर एलआईसी के बोर्ड को अधिक शक्तियां दी गई हैं। अब एलआईसी को नए जोनल ऑफिस खोलने के लिए सरकार की पूर्व अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी।
  • एजेंट्स और मध्यस्थों का 'वन टाइम रजिस्ट्रेशन': बीमा एजेंट्स और मध्यस्थों के लिए 'वन टाइम रजिस्ट्रेशन' की व्यवस्था लागू की जाएगी। इससे बार-बार लाइसेंस रिन्यू कराने का झंझट खत्म होगा।
  • पॉलिसीधारकों की सुरक्षा: विधेयक में पॉलिसीधारकों के हितों की रक्षा के लिए कठोर प्रावधान किए गए हैं। बीमा कंपनियों द्वारा नियमों का उल्लंघन करने पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा।
  • विदेशी री-इंश्योरेंस कंपनियों के लिए राहत: विधेयक में विदेशी री-इंश्योरेंस कंपनियों के लिए 'नेट ओन्ड फंड' की अनिवार्यता को 5,000 करोड़ रुपये से घटाकर 1,000 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव है। इससे भारत में री-इंश्योरेंस का बाजार बड़ा होगा और जोखिम प्रबंधन बेहतर होगा।

बाजार पर असर

बीमा क्षेत्र में 100% एफडीआई के प्रस्ताव के बाद, शेयर बाजार में लिस्टेड बीमा कंपनियों जैसे एलआईसी, एसबीआई लाइफ और एचडीएफसी लाइफ के शेयरों में हलचल हो सकती है। विश्लेषकों के अनुसार, यह सुधार अगले एक दशक में भारतीय बीमा क्षेत्र की तस्वीर पूरी तरह बदल सकता है।




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