साढ़े चार वर्ष के पहले नहीं हटाए जा सकेंगे नगरीय निकायों के अध्यक्ष या उपाध्यक्ष


साढ़े चार वर्ष के पहले नहीं हटाए जा सकेंगे नगरीय निकायों के अध्यक्ष या उपाध्यक्ष

नगरीय निकायों के अध्यक्ष या उपाध्यक्ष को 4.5 साल (साढ़े चार वर्ष) से पहले नहीं हटाया जा सकता। संविधान के अनुसार, नगरीय निकायों के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है, और उन्हें 5 वर्ष से पहले केवल अविश्वास प्रस्ताव के माध्यम से ही हटाया जा सकता है, जिसमें एक निश्चित प्रक्रिया का पालन करना होता है।

प्रदेश की नगर पालिकाओं में एक बार फिर राजनीतिक उथल-पुथल तेज हो गई है। पूर्व में प्रदेश सरकार ने 3 वर्षों तक अध्यक्षों के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव न लाने का निर्णय लिया था, लेकिन अब 3 वर्ष पूरे होने के बाद विदिशा सहित प्रदेश की करीब 40 नगर पालिकाओं में अध्यक्षों को हटाने की कवायद तेज हो गई है। सूत्रों की मानें तो इन बढ़ते विरोधों और राजनीतिक अस्थिरता को देखते हुए प्रदेश सरकार अब नगर पालिकाओं के अध्यक्षों का कार्यकाल साढ़े चार वर्ष करने की तैयारी में है।

बताया जाता है कि कई पालिका अध्यक्षों ने सीएम से भेंट कर कहा कि पार्टी के ही पार्षद और नेताओं द्वारा उन्हें काम नहीं करने दिया जा रहा है इस दौरान उन्होंने राजनीतिक स्थायित्व की मांग करते हुए कार्यकाल बढ़ाने का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने नगरीय प्रशासन विभाग को निर्देश दिए हैं कि अध्यक्षों का कार्यकाल साढ़े चार वर्ष करने का प्रस्ताव तैयार किया जाए। माना जा रहा है कि आगामी कैबिनेट बैठक में यह निर्णय यदि पारित होता है तो न केवल विदिशा, बल्कि प्रदेश की अन्य नगर पालिकाओं में चल रही राजनीतिक खींचतान को विराम मिल सकता है। डिप्टी डायरेक्टर नगरीय प्रशासन आरके कार्तिकेय ने बताया कि प्रस्ताव तैयार हो गया है और अपर सचिव महोदय को प्रस्ताव भेजना है उसके बाद कैबिनेट में मंजूरी के लिए रखा जाएगा।




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