यूजीसी ने संस्थानों को प्रवेश रद्द करने वाले छात्रों की फीस लौटाने के लिए निर्देशित किया


यूजीसी ने संस्थानों को प्रवेश रद्द करने वाले छात्रों की फीस लौटाने के लिए निर्देशित किया

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को निर्देश दिया है कि वे उन छात्रों की फीस वापस करें जिन्होंने अपने प्रवेश रद्द किए हैं। लगभग 2,000 छात्रों के 20 करोड़ रुपये से अधिक राशि विभिन्न संस्थानों में फंसी हुई है। यूजीसी ने चेतावनी दी है कि निर्देशों का पालन न करने पर संस्थानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिसमें मान्यता रद्द करना भी शामिल है।

संस्थान 31 अक्टूबर 2025 तक प्रवेश रद्द करने वाले छात्रों की फीस लौटाने के लिए बाध्य हैं। औसतन प्रत्येक छात्र के लगभग 1 लाख रुपये फंसे हैं। यूजीसी ने स्पष्ट किया है कि यदि संस्थान निर्देशों का पालन नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ मान्यता रद्द करने, वित्तीय सहायता रोकने और नए छात्रों के प्रवेश पर रोक लगाने जैसी कार्रवाई की जा सकती है।

यूजीसी के दिशा-निर्देशों के अनुसार, जिन छात्रों ने 30 सितंबर 2025 तक अपना प्रवेश रद्द किया है, उन्हें पूरी फीस लौटाई जाएगी। जबकि 1 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2025 के बीच प्रवेश रद्द करने वाले छात्रों से 1,000 रुपये की प्रोसेसिंग फीस काटकर बाकी राशि लौटाई जाएगी।

हालांकि यूजीसी सामान्यत: ऐसे दिशा-निर्देश प्रवेश सत्र शुरू होने (जून-जुलाई) में जारी करता है, लेकिन इस बार छात्रों की बढ़ती शिकायतों और शिक्षा मंत्रालय के हस्तक्षेप के कारण यह देरी से जारी किया गया। यूजीसी ने अब निर्देश दिए हैं कि 2025-26 शैक्षणिक सत्र और पिछले वर्षों में भी जिन छात्रों की फीस वापस नहीं की गई है, उनकी राशि तुरंत लौटाई जाए। अनुवर्ती कार्रवाई न करने पर कड़ी कार्रवाई होगी।

2021 से 2024 के बीच यूजीसी ने 5,000 से अधिक छात्रों के 30 करोड़ रुपये से अधिक की फीस वापस कराई थी। यह कदम छात्रों के अधिकारों की सुरक्षा और फीस प्रबंधन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।




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