प्रधानमंत्री मोदी ने कर्तव्य भवन-3 का उद्घाटन किया | राष्ट्र निर्माण की दिशा यहीं से तय होगी


कर्तव्य भवन-3 के उद्घाटन के बाद PM मोदी का संबोधन, बोले- यहीं से राष्ट्र की दिशा होगी तय

6 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के कर्तव्य पथ पर कर्तव्य भवन-03 का उद्घाटन किया। इसके बाद एक सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अगस्त क्रांति का महीना

प्रधानमंत्री ने कहा, "कर्तव्य पथ, नया संसद भवन, नया रक्षा भवन, भारत मंडपम, राष्ट्रीय युद्ध स्मारक और अब कर्तव्य भवन – ये केवल साधारण इमारतें नहीं हैं। यहां से विकसित भारत की नीतियां बनेंगी, महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाएंगे और आने वाले समय में यहीं से राष्ट्र की दिशा तय होगी।"

‘कर्तव्य’ केवल शब्द नहीं, यह भारत की आत्मा है

मोदी ने कहा, "हमने विचार-विमर्श के बाद इस भवन को ‘कर्तव्य भवन’ नाम दिया है। ये नाम हमारे लोकतंत्र और संविधान के मूल मूल्यों को दर्शाते हैं।"

उन्होंने कहा, "कर्तव्य शब्द भारतीय संस्कृति में सिर्फ दायित्व नहीं, बल्कि कर्म का मूल है। यह भवन केवल ईंट और पत्थर की संरचना नहीं, बल्कि करोड़ों देशवासियों के सपनों को साकार करने की तपोभूमि है।"

21वीं सदी के भारत को चाहिए आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर

प्रधानमंत्री ने कहा, "आज भारत को ऐसे भवनों की आवश्यकता है जो आधुनिक सुविधाओं से युक्त हों, जहां कर्मचारी सहज महसूस करें, निर्णय तेज़ हों और सेवाएं सुगम हों। कर्तव्य पथ के आसपास ऐसे ही कई भवन बनाए जा रहे हैं।"

उन्होंने बताया, "कर्तव्य भवन में रूफटॉप पर सोलर पैनल भी लगाए गए हैं। अभी दिल्ली में भारत सरकार के कई मंत्रालय 50 अलग-अलग स्थानों से संचालित हो रहे हैं, जिनमें से अधिकांश किराए के भवनों में हैं। इन पर हर साल लगभग 1500 करोड़ रुपये का खर्च आता है।"

देश के हर कोने में विकास

मोदी ने कहा, "हमारी सरकार समग्र दृष्टिकोण के साथ राष्ट्र निर्माण में जुटी है। आज देश का कोई भी कोना विकास से अछूता नहीं है।"

  • 30,000 से ज्यादा पंचायत भवन बनाए गए हैं
  • 4 करोड़ से अधिक पक्के घर गरीबों के लिए बनाए गए हैं
  • 300 से अधिक नए मेडिकल कॉलेज स्थापित किए गए हैं
  • 1300 से ज्यादा अमृत भारत रेलवे स्टेशन विकसित किए जा रहे हैं
  • करीब 90 नए एयरपोर्ट भी बनाए जा रहे हैं

कर्तव्य और अधिकार दोनों साथ चलते हैं

प्रधानमंत्री ने महात्मा गांधी को उद्धृत करते हुए कहा, "अधिकार और कर्तव्य एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। जब कोई सरकार अपने कर्तव्यों को गंभीरता से निभाती है, तो उसका प्रभाव सुगठित प्रशासन में दिखता है। पिछला दशक गुड गवर्नेंस का दशक रहा है।"




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