6 वर्षीय रोही मोहज़्ज़ब ने संयुक्त राष्ट्र में रचा इतिहास
नई दिल्ली [भारत], 16 फरवरी: केरल की छह वर्षीय पर्यावरण कार्यकर्ता रोही मोहज़्ज़ब ने बैंकॉक स्थित संयुक्त राष्ट्र एशिया-प्रशांत मुख्यालय में “ग्लोबल कॉन्फ्रेंस ऑन एजुकेशन फॉर ए सस्टेनेबल फ्यूचर (GCE 2026)” के दौरान मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर एक वैश्विक उपलब्धि हासिल की।
कॉमन ग्राउंड इंटरनेशनल अकादमी, कोझिकोड की पहली कक्षा की छात्रा रोही को इस सम्मेलन में आधिकारिक रूप से मुख्य वक्ता और एसडीजी इम्पैक्ट अवॉर्डी के रूप में आमंत्रित किया गया था। यह सम्मेलन यूनेस्को यूथ एजुकेशन रिसर्च सेंटर द्वारा सस्टेनेबल डेवलपमेंट काउंसिल के सहयोग से आयोजित किया गया, जिसे ECOSOC में विशेष परामर्शदात्री दर्जा प्राप्त है।
यह सम्मेलन 11-12 फरवरी 2026 को बैंकॉक स्थित संयुक्त राष्ट्र कॉन्फ्रेंस सेंटर में आयोजित किया गया।
ऐतिहासिक पहल की शुरुआत
संयुक्त राष्ट्र के मंच से रोही ने अपनी वैश्विक पहल “द चिल्ड्रन मूवमेंट फॉर क्लाइमेट कम्पैशन” की औपचारिक शुरुआत की। इस फाउंडेशन का उद्देश्य विश्वभर के बच्चों में पर्यावरणीय जिम्मेदारी और नागरिक जागरूकता को बढ़ावा देना है, ताकि युवा पीढ़ी जलवायु नीति और सतत विकास समाधानों में सक्रिय भागीदारी निभा सके।
सबसे कम उम्र की जलवायु नेता के रूप में पहचान
रोही को विश्व की सबसे कम उम्र की पर्यावरण आवाज़ों में से एक माना जाता है। उनकी प्रमुख पहलें निम्नलिखित हैं:
- काउणट्री प्रोजेक्ट: विश्व पर्यावरण दिवस 2025 पर शुरू की गई पहल, जिसका लक्ष्य 10 लाख स्कूल माइक्रो-नर्सरी के माध्यम से 1 करोड़ पेड़ लगाना है।
- ट्री बैंक नर्सरी प्रोजेक्ट: जिसका उद्घाटन राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर द्वारा किया गया। इसका उद्देश्य 10,000 स्कूलों में हरित शिक्षण पारिस्थितिकी तंत्र स्थापित करना है।
- रीसाइकिल्ड पेपर पासपोर्ट अभियान: मात्र पाँच वर्ष की आयु में रोही ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और 195 विश्व नेताओं को पत्र लिखकर पेड़ों को बचाने हेतु पर्यावरण-अनुकूल पासपोर्ट की वकालत की।
रोही का प्रेरणादायक संदेश
"बच्चे सिर्फ भविष्य नहीं हैं — वे आज ही धरती माता के संरक्षक हैं।"
यूनेस्को के मंच पर रोही का सम्मान भारत और विशेष रूप से केरल के लिए गर्व का क्षण है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि नेतृत्व की कोई आयु सीमा नहीं होती।
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