भारत का सबसे बड़ा रक्षा सौदा: वायुसेना को मिलेंगे 114 राफेल विमान
भारत की रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने 12 फरवरी को फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इस डील की कीमत लगभग ₹3.25 लाख करोड़ बताई जा रही है।
इनमें से 18 विमान डसॉल्ट एविएशन से उड़ने की स्थिति में मिलेंगे, जबकि बाकी 96 भारत में बनाए जाएंगे। लगभग 60% कलपुर्जे स्वदेशी होंगे। यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा रक्षा सौदा है।
यह प्रस्ताव अंतिम मंजूरी के लिए कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) के पास भेजा जाएगा। यह सौदा फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के 17-19 फरवरी के तीन दिवसीय भारत दौरे पर फाइनल हो सकता है। प्रस्ताव को 16 जनवरी को रक्षा खरीद बोर्ड से मंजूरी मिल चुकी थी।
नए राफेल विमानों की खरीद से एयर डिफेंस और बॉर्डर एरिया में तैनाती की क्षमता मजबूत होगी। साथ ही भारतीय तटरक्षक बल (ICG) ने आठ डोर्नियर 228 विमान खरीदने हेतु हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के साथ ₹2,312 करोड़ का समझौता किया। इन विमानों में ऑपरेशनल उपकरण होंगे, जिससे समुद्री सुरक्षा और क्षमता बढ़ेगी।
रक्षा बजट का आवंटन
केंद्रीय बजट 2026-27 में रक्षा मंत्रालय को ₹7.8 लाख करोड़ आवंटित किए गए हैं, जो कुल बजट का 14.67% है। आधुनिकीकरण के लिए निर्धारित ₹2.19 लाख करोड़ में से ₹1.85 लाख करोड़ पूंजीगत खरीद के लिए तय किए गए हैं, जो पिछले वित्त वर्ष से लगभग 24% अधिक है।
मेक इन इंडिया भागीदारी
यह सौदा 'मेक इन इंडिया' के तहत किया जाएगा। डसॉल्ट एविएशन एक भारतीय कंपनी के साथ मिलकर विमानों का निर्माण करेगी। हाल ही में डसॉल्ट ने डसॉल्ट रिलायंस एयरोस्पेस लिमिटेड (DRAL) में हिस्सेदारी 49% से बढ़ाकर 51% कर ली है, जिसमें अनिल अंबानी की रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर भी भागीदार है।
सभी 114 राफेल विमानों में भारतीय हथियार, मिसाइल और गोला-बारूद शामिल किए जाएंगे। सुरक्षित डेटा लिंक के माध्यम से विमानों को भारतीय रडार और सेंसर सिस्टम से जोड़ा जाएगा। डसॉल्ट एयरफ्रेम निर्माण के लिए टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (ToT) भी प्रदान करेगा। ToT पूरी होने के बाद इन विमानों में स्वदेशी कंटेंट 55–60% तक होने की संभावना है।
वायुसेना की आवश्यकता
वायुसेना ने सितंबर 2025 में 114 अतिरिक्त राफेल विमानों की मांग रक्षा मंत्रालय को भेजी थी। वर्तमान में वायुसेना के पास 36 राफेल विमान हैं, जबकि नौसेना ने 26 मरीन वेरिएंट राफेल का ऑर्डर दिया है। अंबाला एयरबेस पर ट्रेनिंग और MRO (मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल) सेंटर पहले से चालू है। वायुसेना के पास तुरंत दो स्क्वाड्रन (36–38 विमान) शामिल करने के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर, स्पेयर पार्ट्स और प्रशिक्षित स्टाफ मौजूद हैं।