प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा 2025 की मेरिट लिस्ट फिर से बनेगी
हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ ने कर्मचारी चयन मंडल की प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा 2025 की मेरिट लिस्ट दोबारा तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
कोर्ट ने परीक्षा परिणामों में कथित गड़बड़ी और अपात्र उम्मीदवारों को गलत तरीके से 5 प्रतिशत बोनस अंक दिए जाने के मामले में दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण आदेश जारी किए।
कोर्ट के निर्देश
कोर्ट ने राज्य शासन और कर्मचारी चयन मंडल को गैर-आरसीआई डिप्लोमा धारक अपात्र अभ्यर्थियों की अभ्यर्थिता समाप्त कर उन्हें चयन प्रक्रिया से बाहर करने के निर्देश दिए हैं।
कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि उम्मीदवारों को पकड़े जाने के बाद अपने अंक कम करने या न करने का विकल्प दिया जाता है, तो यह बेईमानी को बढ़ावा देने और ईमानदार अभ्यर्थियों को दंडित करने जैसा होगा।
इस फैसले से लगभग 13,089 चयनित उम्मीदवारों को बड़ा झटका लगा है।
याचिका में क्या कहा गया
नरसिंहपुर निवासी सोनम अगरैया एवं अन्य दो अभ्यर्थियों द्वारा दायर याचिका में कहा गया कि भर्ती विज्ञापन की कंडिका 7.7 के अनुसार केवल उन्हीं उम्मीदवारों को बोनस अंक मिलना था जिनके पास भारतीय पुनर्वास परिषद (RCI) से मान्यता प्राप्त विशेष शिक्षा डिप्लोमा था।
लेकिन चयन सूची में लगभग 14,964 उम्मीदवारों ने स्वयं को इस श्रेणी में दर्शाकर बोनस अंक प्राप्त कर लिए।
आरसीआई पंजीकरण में गड़बड़ी
याचिका में भारतीय पुनर्वास परिषद (RCI) के आधिकारिक आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया कि पूरे मध्यप्रदेश में:
- 2,194 कार्मिक
- 3,077 पेशेवर
ही आरसीआई पोर्टल पर पंजीकृत हैं। ऐसे में लगभग 15 हजार उम्मीदवारों का विशेष शिक्षा प्रमाणपत्र धारक होना प्रथम दृष्टया संदिग्ध प्रतीत होता है।
याचिका के अनुसार, लोक शिक्षण संचालनालय ने जनवरी 2026 में विभाग को आगाह किया था कि लगभग 18 हजार उम्मीदवारों ने बोनस पात्रता के लिए “हाँ” विकल्प चुना है, जो असामान्य रूप से अधिक है।
चयन मंडल पर आरोप
सुधार पोर्टल खोलने के बावजूद चयन मंडल ने उम्मीदवारों से आरसीआई पंजीकरण संख्या या प्रमाणपत्र नहीं मांगा।
परिणामस्वरूप, बिना किसी भौतिक सत्यापन के केवल सॉफ्टवेयर आधारित घोषणा के आधार पर बोनस अंक दे दिए गए। इससे वास्तविक और योग्य उम्मीदवारों की मेरिट प्रभावित हुई और कई उम्मीदवार चयन सूची से बाहर हो गए।
हाई कोर्ट की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान यह भी बताया गया कि कई ऐसे उम्मीदवार, जिन्होंने गलत जानकारी देकर बोनस अंक प्राप्त किए थे, बाद में हाई कोर्ट पहुंचे और दावा किया कि उन्होंने जल्दबाजी में यह गलती कर दी।
हाई कोर्ट ने ऐसी याचिकाओं को खारिज कर दिया।
याचिका में 27 फरवरी 2026 को जारी कथित त्रुटिपूर्ण मेरिट सूची को रद्द करने और केवल वैध आरसीआई प्रमाणपत्र धारकों को बोनस अंक देकर नई मेरिट सूची जारी करने की मांग की गई थी।
12 मई को अंतिम सुनवाई के बाद कोर्ट ने मामले में अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था।