प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना अगले 5 वर्ष तक जारी
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने चल रही 'कृषक कल्याण वर्ष' योजना के अंतर्गत प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को अगले पांच वर्षों तक जारी रखने का निर्णय लिया है।
योजना के प्रभावी कार्यान्वयन हेतु मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में 20 मई को आयोजित कैबिनेट बैठक में ₹11,608.47 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई।
प्राकृतिक आपदाओं के कारण फसल नुकसान की स्थिति में किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से यह योजना संचालित की जा रही है।
मध्यप्रदेश योजना के कार्यान्वयन, फसल की स्थिति के आकलन तथा उपज अनुमान के लिए प्रौद्योगिकी के उपयोग में अग्रणी राज्यों में शामिल है।
वर्ष 2023-24 में 35.18 लाख किसान आवेदनों पर ₹961.68 करोड़ के दावे स्वीकृत किए गए।
इसी प्रकार वर्ष 2024-25 में 35.56 लाख किसान आवेदनों पर ₹275.86 करोड़ के दावे स्वीकृत किए गए।
राज्य के किसान वर्ष 2016 से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ प्राप्त कर रहे हैं। यह योजना फसल हानि या क्षति की स्थिति में किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान करती है।
किसानों को बीमा प्रीमियम के रूप में:
- खरीफ फसलों के लिए अधिकतम 2 प्रतिशत
- रबी फसलों के लिए 1.5 प्रतिशत
प्रीमियम की शेष राशि को प्रीमियम सब्सिडी माना जाता है, जिसे केंद्र एवं राज्य सरकारें समान रूप से वहन करती हैं।
केंद्र सरकार द्वारा:
- सिंचित जिलों के लिए अधिकतम 25 प्रतिशत
- असिंचित जिलों के लिए अधिकतम 30 प्रतिशत
तक प्रीमियम सब्सिडी सीमा निर्धारित की गई है। इससे अधिक प्रीमियम का भार राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा।
मध्यप्रदेश में क्षतिपूर्ति स्तर 80 प्रतिशत निर्धारित किया गया है और आगामी वर्षों में सभी फसलों के लिए यही स्तर लागू रहेगा।