नासा का परसेवरेंस रोवर मंगल मिशन में एआई की मदद से सफल, भारतीय वैज्ञानिक वंदी वर्मा का नेतृत्व
नासा ने अंतरिक्ष विज्ञान में नया इतिहास रच दिया है। परसेवरेंस रोवर ने पहली बार मंगल ग्रह पर बिना किसी मानवीय निर्देश के पूरी तरह एआई की मदद से खुद रास्ता तय किया। दिसंबर में हुए परीक्षणों के दौरान रोवर ने जनरेटिव डेटा और तस्वीरों का विश्लेषण कर सुरक्षित वेपॉइंट्स चुने और कठिन सतह पर सफलतापूर्वक नेविगेशन किया।
बिना इंसानी मदद के तय किया रास्ता
आमतौर पर मंगल ग्रह पर रोवर को चलाने के लिए पृथ्वी पर बैठे वैज्ञानिकों को हर कदम की योजना बनानी पड़ती है। लेकिन 8 और 10 दिसंबर को किए गए परीक्षणों में रोवर ने पूरी तरह से स्वायत्तता से अपना रास्ता तय किया और अंतरिक्ष विज्ञान में पहला कीर्तिमान स्थापित किया।
तकनीक कैसे काम करती है
मंगल ग्रह पृथ्वी से लगभग 22.5 करोड़ किलोमीटर दूर है, इसलिए वहां सिग्नल पहुंचने में समय लगता है। इस चुनौती को हल करने के लिए रोवर में 'जनरेटिव एआई' तकनीक का इस्तेमाल किया गया। इस तकनीक की मदद से रोवर ने पिछले मिशनों के डेटा को समझा और तस्वीरों के आधार पर सुरक्षित रास्तों के बिंदु तय किए।
भारतीय वैज्ञानिक वंदी वर्मा की मुख्य भूमिका
इस मिशन का नेतृत्व नासा के जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी (JPL) ने किया। वरिष्ठ इंजीनियर और भारतीय मूल की वैज्ञानिक वंदी वर्मा ने बताया कि जनरेटिव एआई अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया को पूरी तरह बदलने वाला है। यह तकनीक मंगल ग्रह की सतह पर सुरक्षित रास्ते चुनने, सही लोकेशन निर्धारित करने और मिशन को आसान बनाने में सक्षम है।
भविष्य में अंतरिक्ष में एआई का महत्व
नासा प्रमुख जेरेड इसाकमैन के अनुसार, यह सफलता दिखाती है कि तकनीकी क्षमताएं काफी आगे बढ़ गई हैं। ऑटोनॉमस और एआई-संचालित रोवर भविष्य के मिशनों को पहले से बेहतर बनाएंगे। पृथ्वी से सिग्नल आने में देरी के बावजूद रोवर मुश्किल रास्तों पर तेजी से निर्णय ले सकेगा, जिससे समय बचेगा और वैज्ञानिक खोजों का दायरा बढ़ेगा।