कच्चा तेल 126 डॉलर प्रति बैरल पहुंचा
पश्चिम एशिया संकट को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता में अनिश्चितता का असर भारत पर भी दिखाई देने लगा है। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी का असर आम लोगों की जेब पर पड़ना तय माना जा रहा है।
30 अप्रैल को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 126.41 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जो पिछले चार वर्षों में सबसे अधिक स्तर है। वहीं घरेलू मुद्रा बाजार में रुपया भी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95 के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया।
इस स्थिति ने वित्त मंत्रालय और भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की चिंता बढ़ा दी है। बाजार बंद होने पर रुपया 94.84 के स्तर पर था (पिछले दिन से चार पैसे कमजोर), लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि 95 का स्तर अब असामान्य नहीं माना जाएगा।
पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर असर
अब यह लगभग तय माना जा रहा है कि सरकारी तेल कंपनियां लंबे समय तक पेट्रोल और डीजल की मौजूदा कीमतों को बनाए नहीं रख पाएंगी। संभावना है कि ईंधन की कीमतों में धीरे-धीरे बढ़ोतरी की जाएगी।
30 अप्रैल को दिनभर रुपया 95 के आसपास बना रहा और एक समय यह 95.34 तक भी पहुंच गया था। इससे पहले रुपया 30 मार्च 2026 को 95 के स्तर को पार कर चुका था।
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) रुपये को 95 से नीचे बनाए रखने की कोशिश कर रहा है और इसी कारण मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप भी किया गया, जिससे रुपया फिर से 95 से नीचे आ गया।
बाजार पर दबाव के कारण
- ब्रेंट क्रूड का 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचना, जिससे व्यापार घाटा बढ़ने का खतरा।
- विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) का लगातार भारतीय बाजार से बाहर निकलना।
- अमेरिकी 10 वर्षीय बॉन्ड की ब्याज दर 4.4% तक बढ़ना।
कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का कारण
वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने के कारण कीमतों में तेजी आई है। पश्चिम एशिया संकट के बावजूद आपूर्ति का मुख्य मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य में अनिश्चितता बनी हुई है, जिससे वैश्विक तेल बाजार प्रभावित हो रहा है।